
देहरादून। मनोचिकित्सक डॉ. रॉबिन विक्टर का कहना है कि बच्चों में एडीएसडी (अटेंशन डेफिशिएट हाइपर एक्टिव डिस्ऑर्डर) की समस्या बढ़ गई है। इसमें बच्चे में एकाग्रता की कमी हो जाती है और बच्चा लापरवाह हो जाता है। यह डिसऑर्डर लड़कियों की अपेक्षा लड़कों में दोगुना होता है।इन दिनों एक के बाद एक परीक्षाओं के रिजल्ट आ रहे हैं और इनमें बेटियां नाम कमा रही हैं। यूपीएससी, सीबीएसई हो या उत्तराखंड बोर्ड और आईसीएसई बोर्ड, हर परीक्षा में बेटियां ही आगे रही हैं। वहीं, बेटे पढ़ाई में फिसड्डी साबित हो रहे हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है बेटियां दृढ़ संकल्प के साथ पढ़ाई कर रही हैं, वहीं लड़कों को इंटरनेट और नशे की लत बर्बाद कर रही है।हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट के मनोचिकित्सक डॉ. रॉबिन विक्टर का कहना है कि बच्चों में एडीएसडी (अटेंशन डेफिशिएट हाइपर एक्टिव डिस्ऑर्डर) की समस्या बढ़ गई है। इसमें बच्चे में एकाग्रता की कमी हो जाती है और बच्चा लापरवाह हो जाता है। यह डिसऑर्डर लड़कियों की अपेक्षा लड़कों में दोगुना होता है।कोरोनेशन अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. निशा सिंघला ने बताया कि नशे की लत के रोजाना 25 से 30 मरीज ओपीडी में आते हैं। इनमें से आठ लड़के 14 से 18 साल तक के होते हैं। ऐसे मामलों में लड़कियों की संख्या शून्य है।



