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बदरी-केदार मंदिर समिति में सीईओ पद की जिम्मेदारी के रुद्रप्रयाग डीएम को सौंपी गई

पूर्व सीईओ की प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद पद पड़ा था खाली

Date/27/03/2026

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देहरादून। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा 2026 से ठीक पहले एक अहम प्रशासनिक फैसला लिया गया है। बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के सीईओ पद पर लंबे समय से रिक्तता थी। बीकेटीसी के पूर्व सीईओ विजय थपलियाल की प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद यह पद खाली पड़ा हुआ था। अब प्रदेश सरकार ने इस महत्वपूर्ण पद पर रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी को अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है।

19 अप्रैल 2026 से चारधाम यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हो रही है। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को और बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे। ऐसे में यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए सीईओ पद की रिक्तता भरी जाना जरूरी था। रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी के पास अब बीकेटीसी की समूची जिम्मेदारी अतिरिक्त रूप से होगी।

चारधाम यात्रा उत्तराखंड की सबसे बड़ी धार्मिक और आर्थिक गतिविधि है। हर साल लाखों श्रद्धालु बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों में दर्शन करने आते हैं। बीकेटीसी विशेष रूप से बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिरों का प्रबंधन संभालती है। इसमें सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, स्वास्थ्य सुविधाएं, सड़क-रोड की स्थिति, आवास और प्रसाद व्यवस्था जैसी कई बड़ी जिम्मेदारियां शामिल हैं।

विजय थपलियाल के जाने के बाद पद खाली रहने से कई काम प्रभावित हो रहे थे। प्रदेश सरकार ने इस रिक्तता को भरने के लिए तेजी से कवायद शुरू की थी। कई पीसीएस अधिकारी इस पद के लिए सिफारिश भी कर रहे थे। लेकिन अंत में सरकार ने रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी को अतिरिक्त प्रभार देकर एक मजबूत और अनुभवी प्रशासक को जिम्मेदारी सौंपी है। रुद्रप्रयाग जिला स्वयं चारधाम क्षेत्र का हिस्सा है, इसलिए डीएम को क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, मौसम और स्थानीय चुनौतियों का पूरा ज्ञान है।

देश के प्रमुख मंदिरों में प्रशासनिक पदों पर आईएएस अधिकारियों को तैनात करने का रुझान बढ़ रहा है। महाकाल मंदिर उज्जैन, वैष्णो देवी मंदिर कटरा, तिरुपति बालाजी और सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई में भी आईएएस अधिकारी मुख्य पद संभालते हैं। इसी तर्ज पर उत्तराखंड सरकार ने इस बार बदरी-केदार मंदिर समिति के सीईओ पद पर भी मजबूत प्रशासनिक अधिकारी को प्राथमिकता दी है।

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