उत्तराखंड

दुर्ग नाम के राक्षस का वध करने से पड़ा मां भगवती का दुर्गा नामः आचार्य नत्थी प्रसाद उनियाल

देहरादून। सरस्वती विहार विकास समिति अजबपुर खुर्द देहरादून द्वारा शिव शक्ति मंदिर सरस्वती विहार में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा का शनिवार को विश्राम हुआ। जिसमें कथावाचक मां राजराजेश्वरी के उपासक आचार्य नत्थी प्रसाद उनियाल ने कथा के विराम दिवस के अवसर पर कहा कि दुर्ग नाम के राक्षस के वध करने से दुर्गा नाम पड़ा, प्रत्येक मातृशक्ति को नारी शक्ति जागृत करने के लिए आगाह कि जिस प्रकार से देवी माता ने प्रत्येक दानवांे का अंत किया उसी प्रकार से हरेक माता हर कष्टों का सामना कर सकती है, मां दुर्गा भगवती की आराधना कैसी करनी चाहिए इस विषय पर विस्तार से सभी भक्तों को बताया। व्यास जी ने कथा के अंत में सरस्वती विहार विकास समिति के समस्त पदाधिकारी एवं क्षेत्रवासियों का आभार प्रकट किया कि उनके द्वारा क्षेत्र में भव्य मंदिर निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास किया जा रहा है जो कि काबिले तारीफ है। इस अवसर पर समिति के सचिव गजेंद्र भंडारी ने बताया कि सरस्वती विहार विकास समिति के तत्वाधान में 21 अप्रैल से 29 अप्रैल तक 9 दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत का आयोजन किया गया जिसमें सभी क्षेत्रवासियों में बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया। शनिवार को भंडारे के रूप में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया तत्पश्चात व्यास जी और आचार्यों की पूजा मंत्रों के साथ विदाई की। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष पंचम सिंह बिष्ट, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बीएस चैहान, उपाध्यक्ष कैलाश राम तिवारी, सचिव गजेंद्र भंडारी, पूर्व अध्यक्ष बी पी शर्मा, वरिष्ठ मंत्री अनूप सिंह फर्त्याल, कोषाध्यक्ष विजय सिंह रावत, ऑडिटर पी एल चमोली, कनिष्ठ मंत्री सुबोध मैठानी, प्रचार सचिव सोहन रौतेला, मंदिर संयोजक मूर्ति राम बिजलवान सह संयोजक दिनेश जुयाल, जयप्रकाश सेमवाल, पुष्कर सिंह नेगी, विनोद किशोर भट्ट, गिरीश चंद डियौडी, सी एम पुरोहित, जयपाल सिंह बत्तवाँल, आशीष गुसाईं, दीपक काला, बगवालिया सिंह रावत, आचार्य उदय प्रकाश नौटियाल, आचार्य सुशांत जोशी, आचार्य अखिलेश बधानी, राजेंद्र सिंह नेगी, कुलानंद पोखरियाल, सुरेंद्र पाल अरोड़ा आदि उपस्थित रहे।

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