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डोली यात्रा के दौरान चिन्हित 254 देवालयों को तीर्थाटन सर्किट में शामिल करने की मांग

देहरादून। विश्वनाथ-जगदीशिला तीर्थाटन समिति ने विश्वनाथ-जगदीशिला डोली रथ यात्रा द्वारा संपूर्ण उत्तराखंड भ्रमण के दौरान गढ़वाल एवं कमाऊं में चिन्हित 254 देवालयों का तीर्थाटन सर्किट में चयन किए जाने एवं पर्यटन गाइड पुस्तक में नाम शामिल किए जाने की मांग मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज से की है। समिति ने इस संबंध में सीएम व पर्यटन मंत्री को समिति द्वारा डोली यात्रा के दौरान चिन्हित किए गए 254 देवालयों की सूची सौंपी है।उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में विश्वनाथ-जगदीशिला डोली यात्रा के संयोजक पूर्व कैबिनेट मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि विश्वनाथ-जगदीशिला डोली रथ यात्रा विगत 23 वर्षों से टिहरी गढ़वाल में गुरु वशिष्ट की तपस्थली एवं व्यवहारिक वेदांत के धनी स्वामी रामतीर्थ की तपस्थली विशोन पर्वत से 30 दिवसीय देवदर्शन यात्रा संपूर्ण उत्तराखंड में विश्व शांति की कामना एवं देवभूमि उत्तराखंड में चारधाम के अलावा हजार धाम स्थापित करने व देव संस्कृति की रक्षा के लिए गंगा दशहरा के पर्व पर आयोजित की जाती है। यह यात्रा उत्तराखंड में 10 हजार 5 सौ किलोमीटर की दूरी तय करके कुमांऊ एवं गढ़वाल व तराई क्षेत्र के 254 विभिन्न धामों के देवालयों से होकर गुजरती है। श्री नैथानी ने कहा कि उत्तराखंड को देवभूमि का दर्जा मिला हुआ है, इस बात को सिद्ध करने के लिए उत्तराखंड राज्य पूरे विश्व में तीर्थाटन प्रदेश के रूप में जाना जाए, इसलिए यात्रा को प्रतिवर्ष गंगा दशहरा से एक माह पूर्व प्रारंभ किया जाता है। इस यात्रा के उद्देश्यों में विश्व शांति की स्थापना, देव संस्कृति को जिंदा रखना, विश्व प्रसिद्ध चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री के साथ-साथ एक हजार शक्तिपीठों को धाम के रूप में विकसित करना, हजार धामों में संस्कृत भाषा के उन्नयन के लिए हजार संस्कृत विद्यालयों की स्थाना करना, हजार धामों में ध्यान केंद्रों की स्थापना करना शामिल है। पत्रकार वार्ता में शिव प्रसाद डंगवाल आदि उपस्थित रहे।

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