Dehradunउत्तराखंड

डॉ. हिमांशु ऐरन को भावपूर्ण सम्मान, नए राष्ट्रीय दायित्व की ओर प्रस्थान

डॉ. हिमांशु ऐरन को भावपूर्ण सम्मान, नए राष्ट्रीय दायित्व की ओर प्रस्थान

Date/03/04/2026

Dehradun/ Uttarakhand prime 24×7 

देहरादून। डॉ. हिमांशु ऐरन ने जब अपने हृदय की गहराइयों से निकले शब्दों में कहा “मेरा हृदय आपके दिए सम्मान से अभिभूत है जय हिन्द, जय सुभारती तो पूरा सभागार भावनाओं से भर उठा। राष्ट्रीय दंत आयोग में पूर्णकालिक सदस्य असेसमेंट- रेटिंग के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे डॉ. ऐरन को रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय परिवार ने एक भव्य, गरिमामयी और भावभीनी विदाई दी।

कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत सुसज्जित वातावरण में हुआ, जहाँ विश्वविद्यालय के प्रत्येक विभाग, संकाय सदस्य, कर्मचारी और छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। मंच पर पहुंचते ही डॉ. ऐरन का स्वागत फूल-मालाओं से लादकर किया गया। यह दृश्य उनके प्रति स्नेह, सम्मान और आत्मीयता का जीवंत प्रतीक बन गया। अपने संबोधन में डॉ. हिमांशु ऐरन ने विश्वविद्यालय में बिताए 18 महीनों को “देशभक्ति और राष्ट्र-निर्माण की भावना से ओत-प्रोत एक अविस्मरणीय यात्रा” बताया। उन्होंने कहा कि विभिन्न अकादमिक धाराओं से जुड़े साथियों के सहयोग ने इस छोटे लेकिन प्रभावशाली कार्यकाल को एक सशक्त और प्रेरक अध्याय बना दिया। कार्यक्रम में डॉ. कृष्ण मूर्ति कार्यकारी अधिकारी रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय का संबोधन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने अत्यंत भावुक शब्दों में कहा कि डॉ. हिमांशु ऐरन केवल एक प्रशासक नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत और संस्थान के लिए परिवर्तनकारी नेतृत्व रहे हैं। उन्होंने कहा, “डॉ. ऐरन ने जिस प्रतिबद्धता, पारदर्शिता और राष्ट्रहित की भावना के साथ सुभारती को दिशा दी है, वह हम सभी के लिए प्रेरणा का स्थायी स्रोत है। हम यह संकल्प लेते हैं कि उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए सुभारती को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएंगे।” प्रति कुलपति डॉ. देश दीपक ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ. ऐरन ने विश्वविद्यालय को नई दिशा, नई ऊर्जा और एक स्पष्ट राष्ट्रीय दृष्टिकोण प्रदान किया। उन्होंने इसे “नेतृत्व, प्रतिबद्धता और दूरदर्शिता का उत्कृष्ट उदाहरण” बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। रजिस्ट्रार खालिद हसन ने कहा कि डॉ. ऐरन का कार्यकाल प्रशासनिक पारदर्शिता, अनुशासन और कार्यकुशलता का पर्याय बन गया। वहीं डीन एकेडेमिक्स ने उनके अकादमिक दृष्टिकोण को विश्वविद्यालय की निरंतर प्रगति का आधार बताया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button