जल जीवन मिशन के ठेकेदारों का भुगतान न होने पर जलापूर्ति बाधित रखी जाएगी
जल जीवन मिशन के ठेकेदारों का भुगतान न होने पर जलापूर्ति बाधित रखी जाएगी

Date/04/04/2024
Dehradun/Uttarakhand prime 24×7
देहरादून। देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़े हुए ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित करते हुए एक पत्र जारी किया है जिसमें उल्लेख किया गया है कि जल जीवन मिशन से जुड़े हुए उत्तराखंड के जितने भी ठेकेदार हैं वह आगामी 6 अप्रैल को 24 घंटे के लिए प्रदेश के विभिन्न जगहों पर जल आपूर्ति पूर्णतः बंद कर देंगे। देहरादून में प्रदर्शन किया जाएगा। देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने बताया कि जल जीवन मिशन से जुड़े हुए ठेकेदारों को उनके काम का भुगतान नहीं किया गया है तथा उन पर प्रोजेक्ट के लिए जो लोन लिया गया हैं उसका ब्याज के साथ-साथ स्टाफ का पेमेंट एवं मशीन का किराया इन सभी के बोझ से दबे चले गए हैं और नौबत ऐसी आ गई है कि अगर जल्द से जल्द भुगतान नहीं किया गया तो हम भूखे मर जाएंगे।
अमित अग्रवाल ने कहा “हम समस्त ठेकेदारगण, जो जल जीवन मिशन हर घर जल योजना के अंतर्गत कार्य कर रहे हैं, पिछले कई वर्षों से निरंतर प्रशासनिक एवं विभागीय उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। इस संबंध में हम कई बार शासन, उच्च अधिकारियों एवं मीडिया के माध्यम से अपनी समस्याओं से अवगत करा चुके हैं, किन्तु आज तक कोई संतोषजनक कार्यवाही नहीं की गई।
देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने बताया कि लंबे समय से भुगतान न होने के कारण ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है। कई ठेकेदारों ने भूमि एवं आभूषण गिरवी रखकर तथा बैंक से ऋण लेकर कार्य पूर्ण किए हैं, परंतु वर्तमान स्थिति में वे ब्याज चुकाने में भी असमर्थ हो चुके हैं। हमें यह जानकारी प्राप्त हुई थी कि केंद्र सरकार द्वारा उत्तराखंड राज्य को लगभग 700 करोड़ की धनराशि उपलब्ध कराई गई है, परंतु वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बावजूद यह राशि ठेकेदारों तक नहीं पहुंची है। अतः हम सभी ठेकेदारगण इस पत्र के माध्यम से शासन एवं प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हैं कि यदि हमारी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो हम बाध्य होकर निम्रलिखित कदम उठाएंगे। अमित अग्रवाल ने बताया कि एसोसिएशन के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं पदाधिकारीयों पर सभी ठेकेदार भाईयों का दबाव इतना बढ़ गया है की ठेकेदार भूखे मर रहे है और सरकार की तरफ से कोई सुनवाई नहीं हो रही। अपने ठेकेदार भाईयों के लिए यह निर्णय लेने पर एसोसिएशन को मजबूर होना पड़ रहा है जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी सरकार की और अधिकारियों कि होंगी।




