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गढ़वाल विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 177 दीक्षार्थियों ने ली पीएच.डी. की उपाधि

गढ़वाल विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 177 दीक्षार्थियों ने ली पीएच.डी. की उपाधि

Date/24/03/2026

Srinagar Garhwal/Uttarakhand prime 24×7 

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को धूमधाम से सम्पन्न हुआ। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ योगेन्द्र नारायण की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने दीप प्रज्ज्वल के साथ दीक्षांत समारोह का उद्घाटन किया।

बारहवें दीक्षांत समारोह के अवसर पर 105 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें से 50 विद्यार्थी सत्र 2022-24 के तथा 55 छात्र-छात्राएं 2023-25 के हैं। इसके अतिरिक्त 177 पंजीकृत शोधार्थियों को पीएच.डी. की उपाधियों दी गई जबकि दोनों सत्र में कुल 319 शोधार्थियों ने पीएचडी. की उपाधियां प्राप्त की। वहीं इन दो सत्रों में कुल 6806 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर उपाधियां प्रदान की गई।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि विश्वविद्यालय वर्तमान कुलपति प्रो श्रीप्रकाश के नेतृत्व में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है जिसका प्रमाण विश्वविद्यालय की नैक ग्रेडिंग है, उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को और अधिक ऊर्जा के साथ काम करना होगा जिससे राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय को पहचान मिल सके और इसमें उतराखंड सरकार विश्वविद्यालय के लिए हर आवश्यक योजना में सहभागिता निभाएगी।

उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह में सांस्कृतिक वेशभूषा को अपनाना विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थानों के लिए उल्लेखनीय पहल है जिससे संस्कृति और परम्परा के प्रति छात्र-छात्राओं की रूचि बढ़ेगी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में सुविधाओं की पूर्ति के लिए सरकार तत्पर है और अप्रैल माह में देश के उच्च शिक्षामंत्री के साथ वे एनआईटी और गढ़वाल विश्वविद्यालय में कार्यक्रम सुनिश्चित करेगें।

कुलपति प्रो श्रीप्रकाश सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की गतिविधियों, उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी और कहा कि दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं है बल्कि यह नये जीवन की शुरूआत है, उन्होंने कहा कि डिग्री कोई कागज का टुकड़ा नहीं होता है बल्कि यह विद्यार्थी की ताकत होती है। अंत में उन्होने सभी दीक्षार्थियों से आग्रह किया कि इस अवसर को अपने जीवन का प्रारम्भिक अवसर मानते हुए अगला कदम ऐसा बढ़ाए कि आपके माता-पिता, परिजनों, गुरू और इस विश्वविद्यालय को आप पर गर्व हों और यही नहीं इस देश को आप पर गर्व हो, इसलिए राष्ट्र को प्रथम रखते हुए जीवन-कर्म करें।

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