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केंद्र, पीएमवीबीआरवाई से दो वर्षों में 3.5 करोड़ रोजगार सृजन को प्रतिबद्ध

रोजगार सृजन के केंद्र में है, पहाड़ी एवं सीमावर्ती जिलों से पलायन रोकथाम

Date/09/02/2026

Dehradun/ Uttarakhand prime 24×7 

देहरादून। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोज़गार योजना से दो वर्षों में 3.5 करोड़ रोजगार सृजन की प्रतिबद्धता जताई है। लगभग 3 लाख करोड़ के बजट परिव्यय से संचालित इस योजना के अंतर्गत ही पहाड़ी और सीमावर्ती जिलों में पलायन रोकथाम में मददगार कोशिशें की जा रही हैं। जिसमें अनुकूल इको-टूरिज्म, बागवानी, हथकरघा, हस्तशिल्प और संबद्ध गतिविधियों को प्रमुख रूप से बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट द्वारा राज्यसभा में पर्वतीय एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में पलायन के सम्बन्ध में पूछे गए सवाल के जवाब यह जानकारी सामने आई है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार

शोभा कारान्दलाजे ने बताया कि केंद्रीय द्वारा1 अगस्त 2025 से विनिर्माण क्षेत्र पर विशेष ध्यान देते हुए रोज़गार सृजन को बढ़ावा देने, रोज़गार क्षमता बढ़ाने और सभी क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए “प्रधानमंत्री विकसित भारत रोज़गार योजना“ यानि पीएमवीबीआरवाई नामक रोज़गार से जुड़ी प्रोत्साहन योजना शुरू की गई। इस योजना की पंजीकरण अवधि 31 जुलाई 2027 तक दो वर्ष रखी गई है। जिसका बजटीय परिव्यय 299,446 करोड़ है, जिससे 2 वर्षों की अवधि में पूरे देश में 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियों के सृजन को प्रोत्साहित किया जाना है। जिसके तहत सरकार स्थानीय संसाधनों और तुलनात्मक लाभों के अनुरुप ग्रामीण रोजगार, कौशल विकास और स्व-रोजगार कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय रोजगार के अवसरों को मजबूत करते हुए रोजगार सृजन कर रही है।

पहाड़ी और सीमावर्ती जिलों को लेकर उन्होंने बताया कि कौशल प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और उद्यमिता सहायता तक पहुंच बढ़ाकर वहां के युवाओं की रोजगार क्षमता में सुधार किया जा रहा है। इसके साथ ही, पहाड़ी इलाकों के अनुकूल इको-टूरिज्म, बागवानी, हथकरघा, हस्तशिल्प और संबद्ध गतिविधियों जैसी क्षेत्र-विशिष्ट आजीविका को बढ़ावा दे रही है। स्थानीय उद्यमों और दूरस्थ कार्य के अवसरों को समर्थ बनाने के लिए डिजिटल कनेक्टिविटी सहित बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में सुधार कर रही है। क्षेत्र-विशिष्ट विकास अंतरालों को दूर करने के लिए राज्य सरकार की पहलों के साथ केंद्रीय योजनाओं का एकीकृत क्रियान्वयन कर रही है। इन उपायों का उघ्द्देश्य स्थानीय आर्थिक स्थितियों में सुधार करते हुए मजबूरीवश होने वाले प्रवासन को कम करना है, वहीं बेहतर अवसरों की तलाश में व्यक्तियों के प्रवास करने की स्वतंत्रता का सम्मान करना है।

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