कुंड बैराज गेट खुलते ही मटमैली हुई मंदाकिनी, केदारघाटी में दहशत
हाईवे निर्माण का मलबा बना बड़ा खतरा

Date/25/03/2026
Rudraprayag/Uttarakhand prime 24×7
रुद्रप्रयाग। कुंड बैराज के गेट खोले जाने के बाद मंदाकिनी नदी का पानी अचानक मटमैला हो गया, जिससे नदी किनारे रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई। तेज बहाव और बदले रंग को देखकर लोगों को आशंका हुई कि केदारनाथ धाम क्षेत्र में भारी बारिश के कारण जलस्तर बढ़ रहा है और कोई अनहोनी होने वाली है। दरअसल, सुबह करीब साढ़े सात बजे सिंगोली-भटवाड़ी जल विद्युत परियोजना के अंतर्गत कुंड बैराज के सभी गेट खोले गए, जिससे नदी का जलस्तर और प्रवाह अचानक बढ़ गया। हालांकि प्रशासन द्वारा पूर्व सूचना दी गई थी, लेकिन जैसे ही मटमैला पानी तेजी से बहता दिखाई दिया, लोगों में घबराहट फैल गई।
जांच-पड़ताल में सामने आया कि केदारनाथ हाईवे और उससे जुड़े निर्माण कार्यों का भारी मलबा नियमों को दरकिनार कर नदी किनारों पर डाला जा रहा है। बैराज के गेट खुलते ही यही मलबा तेज बहाव के साथ नदी में बह गया, जिससे पानी का रंग बदल गया और हालात भयावह नजर आने लगे।
स्थानीय लोगों ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि मलबा निर्धारित डंपिंग जोन में डाला जाता, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने चेताया कि इसी तरह की अनदेखी भविष्य में बड़ी आपदा को जन्म दे सकती है।
पर्यावरण विशेषज्ञ देवराघवेन्द्र बद्री ने इस घटना को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि नदियों में मलबा डालना जलीय जीव-जंतुओं और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि जब बरसात के दौरान नदी उफान पर होती है, तब यही मलबा विनाश का कारण बनता है और हालात आपदा जैसे हो जाते हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञ देवराघवेन्द्र ने कहा कि कुंड बैराज का को गेट खोले जाने के बाद जो नुकसान मंदाकिनी नदी को हुआ है, उसकी भरपाई नहीं हो सकती। केदारनाथ हाईवे के साथ ही लिंक मार्गां के निर्माण कार्य का मलबा नदियों के किनारे फेंके जाने से आज समस्या ऐसी बन गई है कि कुंड-बैराज का गेट खोले जाने के बाद ऐसा लगता है कि फिर से कोई आपदा आने वाली है। सबसे बड़ी समस्या तब देखने को मिलती है जब बरसाती सीजन में मंदाकिनी नदी अपने उफान पर रहती है और डंपिंग जोन का मलबा नदियों में फेंके जाने से ये मलबा तबाही मचाने का काम करता है। पर्यावरण विशेषज्ञ ने कहा कि समय रहते इस विषय पर चिंता करने की जरूरत है, अन्यथा पुनः आपदा की स्थिति में सबकुछ तबाह हो जाएगा।




