Education

ई-ग्रंथालय पर एक लाख छात्र-छात्राए पंजीकृतः डॉ. धन सिंह रावत

115 राजकीय एवं सहायता प्राप्त महाविद्यलयों में ई-ग्रंथालय स्थापित

देहरादून। प्रदेश के समस्त राजकीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में एक क्लिक पर लाखों किताबें उपलब्ध रहेंगी। सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की पहल पर राज्य के 115 उच्च शिक्षण संस्थानों को ई-ग्रंथालय पोर्टल से जोड़ा गया है। ई-ग्रंथालय पोर्टल पर इन उच्च शिक्षण संस्थानों के एक लाख 9 हजार 250 छात्र-छात्राओं एवं फैकल्टी मेंबर्स का पंजीकरण किया जा चुका है, जोकि डिजिटल एजुकेशन के क्षेत्र में राज्य के लिये एक बड़ी उपलब्धि है। ई-ग्रंथालय पर पंजीकृत होने से उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र-छात्राओं को अब किताबों की कमी से नहीं जूझना पड़ेगा, उन्हें ई-ग्रंथालय पोर्टल पर कोर्स बुक के साथ-साथ विभिन्न विषयों के रिसर्च पेपर ऑनलाइन उपलब्ध मिलेंगे।सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि उत्तराखंड डिजिटल एजुकेशन के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा में नवाचार, कौशल विकास, शोध एवं रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी कड़ी में राज्य की उच्च शिक्षा का डिजिटलीकरण करते हुये सभी राजकीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को ई-ग्रंथालय पोर्टल से जोड़ा गया है। डॉ. रावत ने बताया कि ई-ग्रंथालय से अब तक प्रदेश के 115 उच्च शिक्षण संस्थानों को जोड़ा जा चुका है, जिसमें 106 राजकीय महाविद्यालय, 3 अशासकीय महाविद्यालय, 5 राजकीय विश्वविद्यालय एवं एक विश्वविद्यालय परिसर शामिल है। शीघ्र ई-ग्रंथालय से शतप्रतिशत उच्च शिक्षण संस्थानों को जोड़ दिया जायेगा, इस दिशा में लगातार काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि ई-ग्रंथालय पोर्टल पर अब तक प्रदेशभर के एक लाख 9 हजार 250 विद्यार्थियों एवं फैकल्टी मेंबरों को पंजीकृत किया जा चुका है, जोकि प्रदेश के लिये एक बड़ी उपलब्धि है। विभागीय मंत्री ने बताया कि कॉलेज के छात्रों को ई-ग्रंथालय का सीधा फायदा मिल सकेगा। इसके माध्यम से कॉलेज छात्र-छात्राएं और शिक्षक वह पुस्तकें भी पढ़ पाएंगे जो उनकी लाइब्रेरी में उपलब्ध नहीं हैं और ई-ग्रंथालय में हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राएं इसका उपयोग कर सकें, इसके लिए उन्हें लिंक और पासवर्ड उपलब्ध कराया जायेगा ताकि वह कहीं से भी इसका एक्सेस कर अपनी जरूरत और पसंद की किताबें पढ़ सकेंगे।

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