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आपदाग्रस्त क्षेत्रों की अनदेखी पर जनप्रतिनिधियों का आमरण अनशन शुरू

आपदाग्रस्त क्षेत्रों की अनदेखी पर जनप्रतिनिधियों का आमरण अनशन शुरू

Date/03/03/2026

Rudraprayag/Uttarakhand prime 24×7 

रुद्रप्रयाग। एक ओर पूरा जिला होली के रंग में सराबोर है। वहीं दूसरी ओर बसुकेदार तहसील के आपदा प्रभावित गांवों में पीड़ा और आक्रोश का रंग गहराता जा रहा है। अगस्त 2025 में आई भीषण दैवीय आपदा बादल फटना, भूस्खलन और जलप्रलय से तबाह हुए क्षेत्रों में अब तक राहत और पुनर्निर्माण कार्य शुरू न होने के विरोध में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने दो मार्च से आमरण अनशन शुरू कर दिया है।

तालजामण, जोला, डुंगर, भटवाड़ी, बड़ेथ और पातियूं गांवों में आपदा के घाव आज भी ताजा हैं। टूटी सड़कें, क्षतिग्रस्त पुल, उजड़ा बाजार और ठप संचार सेवाएं ग्रामीणों के जीवन को लगातार प्रभावित कर रही हैं। कई महीने बीत जाने के बावजूद पुनर्निर्माण कार्यों की धीमी गति, या यूं कहें कि ठप स्थिति ने ग्रामीणों को आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया है। आमरण अनशन पर बैठे जनप्रतिनिधियों में पूर्व प्रधान तालजामण शिवानंद नौटियाल, ग्राम प्रधान तालजामण दीनानाथ, ग्राम प्रधान जोला दीपा देवी तथा ग्राम उछोला के प्रतिनिधि रामचंद्र शामिल हैं। ये सभी बसुकेदार तहसील के विभिन्न प्रभावित गांवों की आवाज बनकर धरने पर बैठे हैं। अनशनकारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया। ज्ञापन सौंपे, बैठकें कीं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई। मजबूर होकर उन्हें आमरण अनशन का रास्ता अपनाना पड़ा। रुद्रप्रयाग में आंदोलनकारियों ने प्रशासन के समक्ष 10 सूत्रीय मांगें रखी हैं। जिनमें प्रमुख रूप से क्षतिग्रस्त सड़कों का शीघ्र निर्माण, चंदन गंगा नदी पर स्थायी पुल का निर्माण, छेनागाड़ बाजार का पुनर्निर्माण, मोबाइल और संचार नेटवर्क की बहाली, बैंकिंग सुविधाओं की पुनर्स्थापना आपदा प्रभावित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास की मांग है. ग्रामीणों का आरोप है कि आपदा के बाद से वे मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। स्कूली बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में जोखिम उठाना पड़ रहा है और व्यापार पूरी तरह प्रभावित है। रुद्रप्रयाग में आंदोलनकारियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आमरण अनशन जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप कर राहत और पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू करने की मांग की है। वहीं मामले में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि ग्रामीणों की मांगों पर कार्यवाही जारी है। ग्रामीणों को समझाया जाएगा और अनशन तोड़ने को लेकर अधिकारियों को भेजा जाएगा।

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